सोमवार शाम छत्तीसगढ़ के लाखों मोबाइल फोन पर अचानक तेज आवाज के साथ “Extremely Severe Alert” फ्लैश होते ही लोगों में कुछ पल के लिए दहशत का माहौल बन गया। कई लोग इसे किसी बड़ी आपदा या तकनीकी गड़बड़ी समझ बैठे। तेज अलार्म की आवाज सुनकर लोग घबरा गए और तुरंत अपने मोबाइल की स्क्रीन देखने लगे।
हालांकि कुछ ही क्षण बाद जब लोगों ने संदेश पढ़ा तो उन्हें राहत मिली कि यह भारत सरकार की आपदा चेतावनी प्रणाली के माध्यम से जारी किया गया मौसम संबंधी अलर्ट था। अलर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि अगले तीन घंटे के भीतर छत्तीसगढ़ के कई जिलों में तेज गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश और आंधी की संभावना है। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली, लेकिन संभावित खराब मौसम को देखते हुए सतर्क भी हो गए।
इन जिलों के लिए जारी हुआ अलर्ट
अलर्ट में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, महासमुंद, बलौदाबाजार, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ़, जशपुर, सरगुजा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मुंगेली, कबीरधाम, बेमेतरा और खैरागढ़-छुईखदान-गंडई सहित कई जिलों में अगले तीन घंटे तक खराब मौसम की चेतावनी दी गई।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ अलर्ट
मोबाइल स्क्रीन पर आए इस अलर्ट के स्क्रीनशॉट और वीडियो कुछ ही मिनटों में व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स (ट्विटर) पर वायरल होने लगे। लोगों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। किसी ने लिखा, अचानक इतनी तेज आवाज आई कि लगा फोन हैक हो गया, तो किसी ने कहा, पहली बार ऐसा अलर्ट आया, पहले डर लगा फिर समझ आया कि यह मौसम की चेतावनी है।
क्या है यह इमरजेंसी अलर्ट सिस्टम?
यह अलर्ट सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक (Cell Broadcast Technology) के जरिए भेजा जाता है। इसमें किसी मोबाइल नंबर पर अलग-अलग संदेश भेजने की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि जिस क्षेत्र में खतरा होता है, वहां मौजूद सभी मोबाइल फोनों पर एक साथ चेतावनी पहुंच जाती है। यह सेवा प्राकृतिक आपदाओं, अत्यधिक वर्षा, आंधी, बिजली गिरने, चक्रवात, भूकंप जैसी आपात परिस्थितियों में लोगों को समय रहते सतर्क करने के लिए विकसित की गई है।



शिकायत में कहा गया है कि वर्षा ऋतु शुरू होने से पहले नदी किनारे बिना रिटेनिंग वॉल बनाए मिट्टी डाल दी गई, जिसके कारण बारिश के दौरान मिट्टी नदी में बह रही है। इससे न केवल पर्यावरणीय नुकसान होने की आशंका जताई गई है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी आरोप लगाया गया है।
इस स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए राजिम विधानसभा क्षेत्र के विधायक रोहित साहू ने कहा कि नगर पंचायत कोपरा में स्वच्छ पेयजल की सुचारू व्यवस्था क्षेत्र की जनता की प्रमुख मांग थी। आज मुझे यह बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि हमारी सरकार ने कोपरा के लिए 20 करोड़ 35 लाख रुपए की जल आवर्धन योजना को स्वीकृति दे दी है। इस ऐतिहासिक सौगात के लिए मैं प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और नगरीय प्रशासन मंत्री अरुण साव का सहृदय आभार और धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ।
हमारी सरकार विकास और सुशासन के मूलमंत्र पर काम कर रही है। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा हर नागरिक का अधिकार है और यह योजना हमारे इसी संकल्प को पूरा करेगी। क्षेत्र का चहुंमुखी विकास और जनता की समस्याओं का त्वरित निराकरण ही हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। बहुत जल्द इस योजना का भूमिपूजन कर कार्य प्रारंभ किया जाएगा ताकि नगरवासियों को जल्द से जल्द इसका सीधा लाभ मिल सके।



जानकारी के अनुसार, इंदिरा मार्केट निवासी प्रदीप कश्यप (लगभग 35 वर्ष) शनिवार दोपहर करीब 2.45 बजे अपनी पत्नी मंगला कश्यप और एक मासूम बच्चे के साथ महानदी के नेहरू घाट के पास नहाने पहुंचे थे। प्रदीप नदी में स्नान कर रहे थे, जबकि उनकी पत्नी घाट पर कपड़े धो रही थीं। इसी दौरान नदी में नहा रहे दो अन्य मासूम बच्चे अचानक गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बच्चों को बचाने के लिए प्रदीप कश्यप और एक अन्य युवक बिना देर किए नदी में कूद पड़े। दोनों ने जान जोखिम में डालकर बच्चों तक पहुंचने का प्रयास किया।
घटना की सूचना मिलते ही गोबरा नवापारा पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल एसडीआरएफ को सूचना दी गई। करीब शाम 4 बजे एसडीआरएफ की टीम विशेष उपकरणों, ऑक्सीजन मास्क और मोटर बोट के साथ मौके पर पहुंची और सघन रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। करीब तीन घंटे तक टीम ने नदी के कई हिस्सों में गहन खोजबीन की। गोताखोरों ने गहरे पानी में उतरकर तलाशी ली और बोट के जरिए बहाव वाले क्षेत्र का निरीक्षण किया, लेकिन देर शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं मिला।
घटना की जानकारी मिलते ही नगर पालिका अध्यक्ष ओम कुमारी साहू भी नेहरू घाट पहुंचीं। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और हरसंभव प्रशासनिक सहायता का भरोसा दिलाया। इस दौरान पुलिस, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में नगरवासी घटनास्थल पर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सुशासन, विकास और जनकल्याण ही हमारी सरकार की पहचान है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा किया है। उन्होंने कहा कि ‘‘मोदी की गारंटी, यानी गारंटी पूरा होने की गारंटी’’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि हमारी सरकार की कार्यशैली और जनविश्वास का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही आधारित प्रशासन स्थापित करने के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। भ्रष्टाचार और अपराध के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई के साथ नागरिक सेवाओं को अधिक सरल और सुलभ बनाया जा रहा है।
कार्यक्रम में कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में आरंग विधानसभा क्षेत्र को अब तक 858 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात मिल चुकी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में विकास और सुशासन की नई दिशा स्थापित हुई है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ‘‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’’ अभियान के अंतर्गत आंवला का पौधारोपण किया। उन्होंने सरस्वती साइकिल योजना के तहत कक्षा 9 की छात्राओं को साइकिल वितरित की तथा जिला प्रशासन के मिशन उत्कर्ष के अंतर्गत उत्कृष्ट विद्यार्थियों को सम्मानित किया।
इस महतारी सदन के बन जाने से ग्राम पंचायत बासीन और आसपास की महिलाओं को विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और रचनात्मक गतिविधियों के लिए एक सर्वसुविधायुक्त मंच मिलेगा। यहाँ महिलाएं स्व सहायता समूहों की बैठकें आयोजित कर सकेंगी साथ ही विभिन्न कौशल विकास व स्वरोजगार प्रशिक्षण कार्यक्रमों का लाभ उठा सकेंगी इसके अलावा सामाजिक एवं सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन सुचारू रूप से कर पाएँगी। लंबे समय से गाँव में महिलाओं के लिए एक व्यवस्थित भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। 30 लाख रुपए की राशि राशि से बनने वाले इस आधुनिक सदन की सौगात मिलने पर बासीन के ग्रामीणों, विशेषकर महिला शक्ति ने रोहित साहू का आभार व्यक्त किया। 


क्षेत्र के किसान कई दिनों से मानसून की राह देख रहे थे। बारिश नहीं होने से खेतों की तैयारी और बुआई का काम पिछड़ रहा था। शनिवार को आखिरकार मानसून ने जोरदार दस्तक दी, लेकिन एक ही रात की तेज बारिश ने जनजीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया। खेतों में पानी भरने से किसानों को राहत मिली, लेकिन सड़क मार्ग से छोटे पुलिया बहने जैसी घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है।
रात में अंधेरा और तेज बहाव के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। सुबह होते ही गरियाबंद और महासमुंद जिला प्रशासन की संयुक्त रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। समय रहते चलाए गए इस अभियान से एक बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने लगातार हो रही बारिश को देखते हुए नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।


