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गुरु खुशवंत साहेब

कुलगाम आतंकी हमले के पीड़ित परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है साय सरकार : गुरु खुशवंत साहेब

(सीजी टॉकिज) रायपुर:- जम्मू-कश्मीर के दक्षिण कश्मीर स्थित कुलगाम में आतंकवादियों द्वारा किए गए कायराना हमले में सक्ती जिले के मालखरौदा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बुंदेली निवासी प्रवासी श्रमिक दीपक रात्रे (21 वर्ष) एवं सारंगढ़ बिलाईगढ़ निवासी भूपेन्द्र भैंना के निधन पर छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री एवं सक्ती जिले के प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने गहरा शोक व्यक्त किया है।

कैबिनेट मंत्री एवं सक्ती जिला प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने इस जघन्य एवं अमानवीय आतंकी घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना मानवता के विरुद्ध अपराध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार इस दुःख की घड़ी में शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदनशीलता और मजबूती से खड़ी है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी ने कुलगाम आतंकी हमले में दिवंगत दोनों श्रमिक दीपक रात्रे और भूपेंद्र भैना के परिजनों को 20–20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की घोषणा की है। यह सहायता राशि परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करेगी।

गुरु खुशवंत साहेबसक्ती जिला प्रभारी मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर प्रशासन के साथ लगातार समन्वय स्थापित किया जा रहा है। पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक पहल की जा रही है। मंत्री गुरु साहेब ने कहा कि सुरक्षा एवं स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए दिवंगत अंतिम संस्कार जम्मू-कश्मीर में ही उनके परिजनों की उपस्थिति में किया गया।

ग्राम बुंदेली निवासी दीपक रात्रे लगभग एक वर्ष पूर्व अपने परिवार के साथ जम्मू-कश्मीर के एक ईंट-भट्ठे में मजदूरी करने गए थे। उनके साथ उनकी पत्नी एवं भाई भी वहीं कार्यरत थे। दीपक अपने पीछे पत्नी, एक मासूम बच्चे तथा परिजनों को छोड़ गए हैं। इस दुखद घटना से पूरे छत्तीसगढ़ में शोक की लहर है।

अंत में सक्ती जिला प्रभारी मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने दिवंगत दीपक रात्रे और भूपेन्द्र भैना की पुण्यात्मा की शांति के लिए परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी से प्रार्थना करते हुए शोक संतप्त परिवार को इस असहनीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।

जम्मू-कश्मीर में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की हत्या: आतांकियों ने पहले नाम पूछा… फिर बरसा दी गोलियां

(सीजी टॉकिज) रायपुर/कुलगाम :- जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में आतंकवादियों ने एक बार फिर इंसानियत को शर्मसार करते हुए छत्तीसगढ़ के दो प्रवासी मजदूरों की निर्मम हत्या कर दी। आतंकियों ने पहले मजदूरों की पहचान पूछी, नाम जानने के बाद हिंदू होने पर दोनों को अलग किया और बेहद करीब से ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।

इस कायराना हमले में सक्ती जिले के दीपक रात्रे (24) और सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के भूपेंद्र भैना (28) की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे छत्तीसगढ़ में शोक और आक्रोश का माहौल है, जबकि सुरक्षा एजेंसियों ने इलाके की घेराबंदी कर बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

पहले नाम पूछा… फिर मौत के घाट उतार दिया

प्रारंभिक जांच के अनुसार, आतंकियों ने कुलगाम जिले के केलाम स्थित ईंट-भट्ठे पर पहुंचकर वहां काम कर रहे मजदूरों की पहचान पूछी। नाम और धर्म की पुष्टि करने के बाद उन्होंने दोनों हिंदू मजदूरों को समूह से अलग किया और नजदीक से गोलियां मार दीं। घटना को पहलगाम हमले की तर्ज पर अंजाम दिया गया माना जा रहा है। हमले के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया और आतंकियों की तलाश में अभियान शुरू कर दिया।सक्ती जिले के बुंदेली गांव निवासी दीपक रात्रे करीब एक वर्ष पहले अपनी पत्नी और भाई के साथ मजदूरी के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे। वे ईंट-भट्ठे पर काम कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। दीपक अपनी मां, दिव्यांग भाई, पत्नी और दो वर्षीय बेटे का इकलौता सहारा था।

वहीं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के छुईहा गांव निवासी भूपेंद्र भैना अपनी पत्नी के साथ तीन माह पहले मजदूरी करने कश्मीर पहुंचे थे। उनके परिवार में दो वर्षीय बेटा, बहन और दादी हैं। दोनों युवकों की मौत की खबर मिलते ही गांवों में मातम छा गया।

सूत्रों के मुताबिक, आतंकी हमला शुक्रवार रात करीब 8.30 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों ने 3 से 4 राउंड फायरिंग की आवाजें सुनीं। शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि आतंकियों ने पहले से रेकी कर इस स्थान को चुना था। जांच एजेंसियों को हमले में एक स्थानीय और एक विदेशी आतंकी के शामिल होने का संदेह है। सुरक्षा एजेंसियां हर एंगल से जांच कर रही हैं।

घटना के तुरंत बाद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा बल मौके पर पहुंचे। पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया। आने-जाने वाले वाहनों की सघन जांच की जा रही है और आतंकियों की तलाश तेज कर दी गई है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया 20-20 लाख की सहायता का ऐलान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताते हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने दोनों मृतकों के परिजनों को 20-20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। साथ ही जम्मू-कश्मीर सरकार से समन्वय के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने की बात भी कही, ताकि पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता मिल सके।

जम्मू-कश्मीर सरकार भी देगी सहायता

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष से दोनों मृतकों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। उन्होंने इसे बेहद निंदनीय और अमानवीय घटना बताया।

नेताओं ने जताया शोक, आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश

उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, कैबिनेट मंत्री एवं सक्ती जिला प्रभारी मंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल तथा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज सहित कई नेताओं ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। सभी ने आतंकवाद की कड़ी निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता देने और दोषियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग की।

दीपक और भूपेंद्र रोजी-रोटी की तलाश में हजारों किलोमीटर दूर गए थे, लेकिन आतंकवाद की अंधी हिंसा ने दोनों परिवारों की खुशियां छीन लीं। एक परिवार का इकलौता कमाने वाला बेटा चला गया तो दूसरे परिवार का मासूम बेटा अपने पिता के साये से हमेशा के लिए वंचित हो गया। यह कायराना हमला पूरे छत्तीसगढ़ में शोक का माहौल है।

नवापारा में व्यापारी ने दर्ज कराई अपहरण और उगाही की शिकायत, जांच के बाद ये बात आई सामने, FIR दर्ज, आरोपी गिरफ्तार

(सीजी टॉकिज) नवापारा :- रायपुर जिले के गोबरा नवापारा में एक व्यापारी का अपहरण और बंदूक की नोक पर 10 लाख रुपये की जबरन उगाही के मामले में नया मोड़ आया है। बताया जा रहा है कि पैसों के लेन-देन को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ था। व्यापारी ने आरोपी से पैसे लिए, जिसे वापस नहीं लौटा रहा था। इसी बात पर आरोपी गुस्से में आकर व्यापारी से मारपीट की थी। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया है। मामला गोबरा नवापारा थाना क्षेत्र का है।

पुलिस के अनुसार, 20 जुलाई 2026 की शाम करीब 7.30 बजे तर्री रोड स्थित कैंटीन में शिकायतकर्ता मयंक छल्लानी और आरोपी गुलजार खान के बीच 10 लाख रुपये के लेनदेन को लेकर विवाद हुआ। आरोप है कि इसी दौरान गुलजार खान ने अपने साथी अलीम खान के साथ मिलकर मयंक छल्लानी से अश्लील गाली-गलौज की, हाथ-मुक्कों से मारपीट की और जान से मारने की धमकी दी।

घटना के बाद घायल मयंक छल्लानी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गोबरा नवापारा में प्राथमिक उपचार कराया गया। बाद में उसे रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया। घटना के दो दिन बाद 22 जुलाई को मयंक छल्लानी ने नवापारा थाने में लिखित शिकायत दी। शिकायत में मयंक छल्लानी ने आरोप लगाया था कि आरोपी गुलजार खान ने बंदूक की नोक पर उसे को जबरदस्ती अपनी स्कूटी पर बैठाया और उन्हें तर्री रोड स्थित कैंटीन के बेसमेंट में ले गया।

मयंक ने आरोप लगाया था कि आरोपी गुलजार ने उसके कान के पास बंदूक के निचले हिस्से से वार किया और उन्हें 15-20 थप्पड़ मारे गए। बदमाशों ने उनसे 10 लाख रुपये की मांग की और जान से मारने की धमकी दी। इस दौरान उन्होंने इसका वीडियो भी बनाया। डर के मारे मयंक ने अपने परिचित से फोन पर संपर्क कर कर्ज के रूप में पैसे मांगे और पैसों का इंतजाम करवाया। आरोपियों ने उनके पर्स से 1500 रुपये भी निकाल लिए। इतना ही नहीं, उन्होंने साक्ष्य छिपाने के लिए मयंक के खून से सने कपड़े उतरवा कर नाले में फेंक दिया और नई शर्ट मंगा कर पहनाई।

मयंक ने आरोप लगाया कि पैसे मिलने के बाद जबरन एक वीडियो भी बनवाया गया, जिसमें उनसे यह कहलवाया गया कि यह पैसों का लेन-देन आपसी है और उनसे माफी भी मँगवाई गई, ताकि वे पुलिस के पास न जा सकें। मामले की शिकायत मिलते ही पुलिस ने जांच शुरू की।

जमीन खरीद के लिए दिए थे 10 लाख रुपये

जांच के दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों के बयान, घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज तथा व्हाट्सएप चैट का परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि मयंक छल्लानी और गुलजार खान पूर्व से परिचित थे। दोनों ने ग्राम बकली (राजिम) में जमीन खरीदकर अधिक कीमत पर बेचने की योजना बनाई थी। इस सौदे के लिए गुलजार खान ने 17 जून 2026 को मयंक छल्लानी को 10 लाख रुपये दिए थे। हालांकि जमीन का सौदा नहीं हो सका, जिसके बाद गुलजार खान अपनी रकम वापस मांग रहा था।

पैसे लौटाने को लेकर बढ़ा विवाद

पुलिस के अनुसार, रकम वापस करने में टालमटोल के कारण दोनों पक्ष कैंटिन पहुंचे, जहां बातचीत के दौरान विवाद बढ़ गया और मारपीट हो गई। घटना के बाद मयंक छल्लानी ने अपने परिचित महेश कंसारी से 10 लाख रुपये मंगवाकर अपने घर के पास गुलजार खान को वापस कर दिए। इस लेनदेन का वीडियो भी बनाया गया, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी रकम के लेनदेन के पूरा होने की बात कही।

अपहरण और उगाही के आरोप नहीं मिले सही

शिकायत में मयंक छल्लानी ने अपने अपहरण, बंदूक की नोक पर 10 लाख रुपये की जबरन उगाही और अन्य गंभीर आरोप भी लगाए थे। लेकिन पुलिस जांच में इन आरोपों के समर्थन में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य नहीं मिला। जांच में केवल गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी के आरोप प्रथम दृष्टया प्रमाणित पाए गए।

FIR दर्ज, आरोपी गिरफ्तार

पुलिस ने आरोपी गुलजार खान और अलीम खान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 115(2), 351(2), 117(2) एवं 3(5) के तहत अपराध दर्ज कर गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच जारी है।

गरियाबंद में दहशत फैला रहा तेंदुआ पिंजरे में कैद, वन विभाग और ग्रामीणों ने ली राहत की सांस

(सीजी टॉकिज) गरियाबंद:- गरियाबंद जिले में पिछले कई दिनों से ग्रामीणों और पालतू मवेशियों के लिए खतरा बने तेंदुआ को आखिरकार वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। ग्राम केरवाहारा और जोबा क्षेत्र में लगातार देखे जा रहे तेंदुए को विशेष रणनीति के तहत लगाए गए केज ट्रैप (पिंजरे) में सुरक्षित पकड़ लिया गया। इस सफलता के बाद पूरे क्षेत्र में राहत का माहौल है।

वन विभाग के अनुसार, पिछले कुछ समय से तेंदुए की गतिविधियां लगातार गांव के आसपास देखी जा रही थीं। इससे ग्रामीणों में भय का वातावरण था। तेंदुए द्वारा पहले पालतू मवेशियों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई थीं, वहीं स्कूल और आबादी क्षेत्र के आसपास उसकी मौजूदगी की सूचना मिलने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ गई थी।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए वनमंडलाधिकारी शशिगानंद के. (IFS), उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और वन्यप्राणी चिकित्सकों की निगरानी में पूरे क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। तेंदुए की गतिविधियों पर लगातार नजर रखने के साथ रणनीतिक स्थानों पर केज ट्रैप लगाए गए तथा किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को आवश्यक संसाधनों के साथ तैनात किया गया।

पिंजरे में कैद हुआ तेंदुआ

वन विभाग की लगातार निगरानी और सुनियोजित रणनीति आखिरकार सफल रही। शुक्रवार को तेंदुआ सुरक्षित रूप से केज ट्रैप में पहुंच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र को सुरक्षित घेराबंदी कर तेंदुए की निगरानी शुरू कर दी। विभाग ने बताया कि रेस्क्यू अभियान के दौरान तेंदुए को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंचाई गई।

पकड़े गए तेंदुए का तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। जांच में उसके शारीरिक स्वास्थ्य, किसी प्रकार की चोट या बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का आकलन किया जाएगा। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर वन विभाग आगे की कार्रवाई करेगा।

वन विभाग की अपील

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि तेंदुए को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें। यदि वन्यजीव से जुड़ी कोई भी सूचना मिले तो तत्काल निकटतम वन अमले को सूचित करें। विभाग ने कहा कि मानव और वन्यजीव, दोनों की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से आवश्यक कार्रवाई लगातार की जा रही है।