(सीजी टॉकिज) दुर्ग:- छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा संचालित साइबर जागृति अभियान एवं संवाद से समाधान के तहत मैत्री दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, अंजोरा (दुर्ग) में व्यापक साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को वर्तमान में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों, उनसे बचाव के उपायों और साइबर फ्रॉड की स्थिति में तत्काल की जाने वाली कार्रवाई की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में दुर्ग एसएसपी विजय अग्रवाल, एएसपी ग्रामीण दुर्ग मणिशंकर चन्द्र, एएसपी श्रीमती ममता देवांगन, एएसपी यातायात कौशलेन्द्र पटेल, सीएसपी दुर्ग हर्षित मेहर, डीएसपी श्रीमती भारती मार्कराम, एसडीओपी चित्रा वर्मा, उप निरीक्षक साइबर संकल्प राय, उप निरीक्षक महिला थाना नीता राजपूत, अंजोरा थाना प्रभारी चन्द्रशेखर सोनी तथा एएसआई गुरविंदर सिंह संधू उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को अपने-अपने अनुभव के अनुरूप साइबर अपराधों के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती, जागरूकता की आवश्यकता और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार पर प्रकाश डाला, वहीं साइबर विशेषज्ञों एवं थाना स्तर के अधिकारियों ने वर्तमान में प्रचलित साइबर ठगी के तरीकों तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी।
विद्यार्थियों को यूएसएसडी कोड फ्रॉड एवं अनकंडीशनल कॉल फॉरवर्डिंग, गिफ्ट बॉक्स डिलीवरी फ्रॉड, इंस्टाग्राम पर अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट के माध्यम से मॉर्फिंग, विशेषकर महिलाओं को परेशान करने वाले साइबर अपराध, एपीके फाइल फ्रॉड तथा डिजिटल अरेस्ट जैसे ट्रेंडिंग साइबर अपराधों के संबंध में विस्तार से जागरूक किया गया।
भरोसा, लालच और डर का फायदा उठाते हैं साइबर अपराधी
कार्यक्रम में बताया गया कि साइबर अपराधी अक्सर लोगों के भरोसे, लालच, डर और जल्दबाजी का फायदा उठाकर ठगी को अंजाम देते हैं। ऐसी स्थिति में किसी भी संदिग्ध कॉल, मैसेज, लिंक या डिजिटल गतिविधि पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय “स्टॉप, थिंक एंड एक्ट” यानी रुकें, सोचें और फिर कार्रवाई करें, की नीति अपनाना जरूरी है।
विद्यार्थियों को “थ्री यू” अननोन लिंक, अननोन ऐप और अननोन पर्सन’’ से विशेष सावधानी बरतने की समझाइश दी गई। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक करने, अनजान ऐप डाउनलोड करने या सोशल मीडिया पर अपरिचित व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।
साइबर फ्रॉड में ‘गोल्डन ऑवर’ बेहद महत्वपूर्ण
विद्यार्थियों को साइबर फ्रॉड की स्थिति में गोल्डन ऑवर के महत्व से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि धोखाधड़ी की घटना के तुरंत बाद की गई कार्रवाई से आर्थिक नुकसान को रोकने या सीमित करने की संभावना बढ़ जाती है। छात्र-छात्राओं को राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा नजदीकी थाना पुलिस के माध्यम से तत्काल शिकायत एवं सहायता प्राप्त करने की जानकारी दी गई। उन्हें समझाइश दी गई कि साइबर अपराध की स्थिति में घबराएं नहीं, बल्कि बिना देरी किए संबंधित एजेंसियों को सूचना दें।
कार्यक्रम में उपस्थित महिला पुलिस अधिकारियों ने विशेष रूप से छात्राओं और महिलाओं से संबंधित साइबर अपराधों की जानकारी दी। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाली मॉर्फिंग, फर्जी प्रोफाइल, अनजान फ्रेंड रिक्वेस्ट, ऑनलाइन ब्लैकमेलिंग, अश्लील संदेशों एवं डिजिटल उत्पीड़न जैसे मामलों से बचाव के उपाय बताए। अधिकारियों ने छात्राओं को समझाइश दी कि किसी भी प्रकार की ऑनलाइन प्रताड़ना या साइबर अपराध की स्थिति में भयभीत होने के बजाय तत्काल साक्ष्य सुरक्षित रखें और पुलिस अथवा साइबर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करें।
नशे के दुष्परिणामों के प्रति किया जागरूक
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशा मुक्ति और नशे के दुष्परिणामों के प्रति भी जागरूक किया गया। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार, शिक्षा और भविष्य को गंभीर रूप से प्रभावित करता है तथा कई बार युवाओं को अपराध की ओर भी धकेल देता है। विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे स्वयं किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहें और अपने मित्रों व परिवार के लोगों को भी नशा छोड़ने के लिए प्रेरित करें। अधिकारियों ने कहा कि युवा शक्ति यदि स्वस्थ और नशामुक्त रहेगी तो समाज भी सुरक्षित, जागरूक और मजबूत बनेगा।
विद्यार्थी बनेंगे साइबर जागरूकता के दूत
पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे केवल स्वयं ही साइबर अपराधों से सुरक्षित न रहें, बल्कि अपने माता-पिता, परिवार, रिश्तेदारों और आसपास के लोगों को भी डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। खासकर बुजुर्गों और तकनीक से कम परिचित लोगों को साइबर ठगी के तरीकों के बारे में जानकारी देना जरूरी है।
पुलिस ने कहा कि डिजिटल दुनिया में किसी भी लिंक, फाइल, ऐप अथवा व्यक्ति पर आंख बंद कर भरोसा न करें। सतर्कता, सत्यापन और सुरक्षित डिजिटल व्यवहार को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना ही साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। अंत में पुलिस अधिकारियों ने सभी को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होने का शपथ भी दिलाया।
कॉलेज प्रबंधन ने जताया आभार
कार्यक्रम के अंत में मैत्री एजुकेशनल सोसायटी के महासचिव राजेश जैन एवं डीन डॉ. प्रदीप बाबू कोम्मी ने पुलिस अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में विद्यार्थियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने के साथ-साथ समाज और परिवार को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी पुलिस प्रशासन के साथ मिलकर इस प्रकार के जनजागरूकता कार्यक्रमों में सहयोग करता रहेगा।
इस अवसर पर महाविद्यालय की मैत्री एजुकेशनल सोसायटी के महासचिव राजेश जैन, डीन डॉ. प्रदीप बाबू कोम्मी, डीन (अकादमिक) डॉ. संजीव सिंह, वाइस डीन डॉ. योगेश साहू, वी.के. त्रिपाठी, राजेश भट्टाचार्य, धीरज बंजारी सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, कॉलेज प्रबंधन, चिकित्सक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।












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