(सीजी टॉकिज) :- नवापारा नगर की राजनीति में उस समय बड़ा राजनीतिक विस्फोट हो गया, जब कांग्रेस की तीन बार की विजयी पार्षद, पार्टी की वरिष्ठ नेता और नगर पालिका परिषद में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी निभा रहीं संध्या राव ने कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उनके इस फैसले ने स्थानीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
संध्या राव को कांग्रेस की उन चुनिंदा नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने लगातार जनसमर्थन के दम पर अपनी मजबूत पहचान बनाई। वे नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस की ओर से सर्वाधिक मतों से जीत दर्ज कर चुकी हैं और वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष के रूप में बेहद सक्रिय एवं आक्रामक भूमिका निभा रही थीं। ऐसे में उनका अचानक इस्तीफा पार्टी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं माना जा रहा है।
संगठन को भेजा औपचारिक इस्तीफा
संध्या राव ने अपने इस्तीफे की जानकारी संगठन को औपचारिक पत्र भेजकर दी है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि वे लंबे समय से कांग्रेस पार्टी से जुड़ी रही हैं तथा पार्टी के विभिन्न आंदोलनों, जनसरोकारों और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाती रही हैं। उन्होंने अपने इस्तीफे को व्यक्तिगत निर्णय बताया है।
हालांकि उन्होंने अपने पत्र में इस्तीफे के स्पष्ट कारणों का खुलासा नहीं किया है, लेकिन इतना जरूर कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में उनका पार्टी में बने रहना संभव नहीं था।
कारणों पर सस्पेंस, अटकलों का दौर तेज
स्थानीय लोगों का मानना है कि संध्या राव जैसी सक्रिय और प्रभावशाली नेता का अचानक पार्टी छोड़ना सामान्य घटना नहीं है। यही वजह है कि उनके इस्तीफे के पीछे के कारणों को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक उन्होंने अपने अगले राजनीतिक कदम को लेकर कोई संकेत नहीं दिया है।
कांग्रेस के लिए बड़ा नुकसान!
नगर की राजनीति में मजबूत जनाधार रखने वाली संध्या राव के इस्तीफे को कांग्रेस संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उनके समर्थकों की संख्या अच्छी-खासी है और ऐसे में आने वाले दिनों में उनके फैसले का स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर संध्या राव का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा? क्या वे किसी अन्य दल का दामन थामेंगी या फिर स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनेंगी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में साफ होंगे, लेकिन इतना तय है कि उनके इस्तीफे ने नवापारा की राजनीति में नई सरगर्मी पैदा कर दी है।
















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