(सीजी टॉकिज) नवापारा-राजिम:- शरद पूर्णिमा के अवसर पर नवापारा के विप्र भवन में ब्राम्हण समाज द्वारा आयोजित विशाल जनसमूह के बीच राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा ने खुलकर ब्राम्हण समाज की तारीफ करते हुए कहा कि यह समाज सप्तऋषियों के गोत्र से अवतरित है जो सर्वे भवन्तु सुखिन: के मार्ग पर चलते है। ब्राम्हण समाज सर्वजनों के सुखी जीवन की कामना करते है।
सांसद श्रीमती वर्मा ने कहा कि ब्राम्हण समाज सदैव से अग्रणी भूमिका निभाते चले आ रहे है। बुद्धिजीवी वर्ग के रूप में इस समाज को जाना जाता है। स्वभाव से ब्राम्हण बहुत ही विनम्र होते है। सभी समाज के लोगों का मार्गदर्शन करते है। श्रीमती वर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ में सर्व समाज का तालमेल आपस में बना हुआ है। त्रेता, द्वापर, सतयुग चाहे कलयुग हो इन सभी युगों की बात करते है जिसमें ब्राम्हण समाज ने सनातन धर्म को आगे बढ़ाने का काम किया है। वाल्मीकी रामायण या महाभारत की बात करें तो इसके रचयिता ब्राम्हण ही है।
कहा कि छत्तीसगढ़ का इतिहास अत्यंत समृद्ध है। यह भगवान श्रीराम का ननिहाल और माता कौशल्या की जन्मभूमि के रूप में जाना जाता है। वनवास काल में भी भगवान श्रीराम का छत्तीसगढ़ से गहरा संबंध रहा है। चंद्रखुरी स्थित माता कौशल्या मंदिर प्रदेश की सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। राजिम और नवापारा क्षेत्र का भी अपना गौरवशाली इतिहास है। महानदी हमारे जीवन का आधार है।
इस क्षेत्र की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं ने समाज को सदैव एक नई दिशा दी है। आज आवश्यकता है कि बुद्धिजीवी वर्ग और ब्राह्मण समाज अपनी संस्कृति एवं संस्कारों के संरक्षण के लिए आगे आएं। हमारी सनातन संस्कृति हमें आपस में भेदभाव करना नहीं, बल्कि सदभाव, एकता और भाईचारे के साथ रहना सिखाती है। हमें अपने बच्चों को ऐसे संस्कार देने चाहिए, जिससे वे अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व कर सकें।
राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा का कहना है कि ब्राह्मण समाज अपनी सांस्कृतिक विरासत, सनातन परंपराओं और संस्कारों को सुरक्षित रखते हुए समाज में एकता, सद्भाव और जागरूकता बढ़ाने के लिए आगे आए। हमारी पुरातन परंपराएं, हमारी संस्कृति और हमारे संस्कार ही समाज की असली पहचान हैं। आज के आधुनिक युग में सभ्यता और संस्कृति में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। ऐसे समय में हमें यह विचार करना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कौन-सी विरासत सौंपकर जा रहे हैं। पहले परिवारों में चार-पांच भाई एक साथ रहते थे। परिवार केवल रहने की व्यवस्था नहीं था, बल्कि संस्कारों, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी था।
आज संयुक्त परिवारों की व्यवस्था कमजोर होती जा रही है। यदि परिवार जैसी संस्था ही कमजोर हो जाएगी, तो समाज की मजबूती और एकता पर भी इसका असर पड़ेगा। आज विदेशी सभ्यता और आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के बीच हमें अपनी संस्कृति और संस्कारों को बचाए रखने की आवश्यकता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि हम समय के साथ होने वाले हर बदलाव का विरोध करें, बल्कि हमें अपनी परंपराओं के अच्छे मूल्यों को अपनाते हुए आगे बढ़ना चाहिए।
इतिहास में भी हमारी सनातन संस्कृति को विभिन्न चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। मुगल शासन के दौरान और बाद में अंग्रेजी शासन के समय भी भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं पर अनेक प्रकार के प्रभाव पड़े। मिशनरियों की गतिविधियों और औपनिवेशिक नीतियों ने भी भारतीय समाज को प्रभावित किया। ऐसे दौर में अपनी संस्कृति, संस्कारों और परंपराओं को जीवित रखना समाज के लिए महत्वपूर्ण रहा है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपनी सांस्कृतिक विरासत को केवल याद न रखें, बल्कि उसे अपने जीवन में भी उतारें। अपने बच्चों को संस्कार दें, परिवार की एकता बनाए रखें और समाज में ज्ञान, सदभाव तथा नैतिक मूल्यों को बढ़ावा दें। यही हमारी संस्कृति के संरक्षण और एक सशक्त समाज के निर्माण का मार्ग है। इस अवसर पर राज्य सभा सांसद ने विप्र भवन में विभिन्न निर्माण कार्यो के लिए 10 लाख रूपए देने की घोषणा की।
कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व विधायक संतोष उपाध्याय ने कहा कि संगठन में ताकत है और इसे बिना प्रदर्शित किए आगे बढ़ना संभव नही है। आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शिका बने। मैं युवाओं से कहना चाहता हूं कि समाज के हर कार्यक्रम में आपसी तालमेल बिठाकर बढ़ चढ़कर हिस्सा लें।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नगरपालिका अध्यक्ष ओमकुमारी-संजय साहू ने समूचे ब्राम्हण समाज को शरद पूर्णिमा की बधाई देते हुए कहा कि चंद्रमा का अमृत सबके जीवन में खुशहाली लाए। ब्राम्हण समाज का सदैव से सम्मान करते चले आ रहे है और आगे भी करते रहेंगे। सामाजिक समरसता की भावना हम सबमें बनी रहे।
इस अवसर पर स्वागत भाषण देते हुए नवापारा ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष प्रसन्न शर्मा ने कहा कि परस्पर तालमेल से हम साल भर में जो भी कार्यक्रम ब्राम्हण समाज का करते है उसे भव्य रूप में मनाते है। बताया कि नवापारा ब्राम्हण समाज में सर्व समाज के लिए शव वाहन और शव फ्रीजर समर्पित किया है। विप्र भवन को बहुत कम राशि लेकर सभी समाज को कार्यक्रम के लिए दिया जाता है।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे भगवताचार्य युवराज पाण्डेय ने कहा कि ब्राम्हण का त्याग और तपस्या बहुत ही महान है। आपस में ब्राम्हण न लड़े। बैर भावना न रखें। एक दूसरे का दिलों जान से साथ दें। संस्कृति हमारी गरिमा और अस्तित्व है। आचार्य श्री पाण्डेय ने कहा कि संस्कृत की शिक्षा देने से पहले संस्कृति की शिक्षा देना जरूरी है। कहा कि आज बहुत सारे दिगर लोग चोला पहनकर ब्राम्हण का रूप लेकर घूम रहे है लेकिन ब्राम्हण के खून में जो उबाल रहता है वह रक्त ऐसे लोगों में आ ही नही सकता।
ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में विशेष रूप से हायर सेकेण्डरी स्कूल के सेवानिवृत्त प्राचार्य समाज के वरिष्ठ आरबी शर्मा, शास राजीव लोचन महाविद्यालय के सेवानिवृत्त प्राचार्य ओपी दुबे, रमाकांत शर्मा, सेवानिवृत्त बीएमओ डॉ एके शर्मा, जनपद सदस्य आशीष पाण्डेय, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रफुल्ल दुबे, कुलेश्वर महाविद्यालय के प्राचार्य मधुरानी शुक्ला, प्राचार्य सीमा शर्मा, प्राचार्य आलोक शर्मा, सेवानिवृत्त बीईओ चंद्रशेखर मिश्रा, नवापारा विप्रकुल कोर कमेटी के सदस्य ब्राम्हण समाज के अध्यक्ष प्रसन्न शर्मा, हरिभूमि के ब्यूरोचीफ श्यामकिशोर शर्मा, कैलाश शुक्ला, रमेश तिवारी, सौरभ शर्मा, अजय तिवारी, ज्ञानेश शर्मा, कैलाश तिवारी, मनहरण शर्मा, अंकित शर्मा, अनंत पुराणिक, अशोक तिवारी, शिव तिवारी, गुडडू मिश्रा सहित ब्राम्हण समाज के पूर्व अध्यक्ष सनत शर्मा, विकास तिवारी, सुनील तिवारी, पं दिनेश तिवारी, कन्हैया तिवारी, संतोष मिश्रा, संतोष शर्मा, युवराज पाण्डेय, चंद्रकांत मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, प्रसन्न दुबे, मनीष शर्मा, अतुल शर्मा, संजय शर्मा, पीयूष शर्मा, सौरभ उपाध्याय, ललित पाण्डेय, उत्कर्ष शर्मा, श्याम शर्मा, राम शर्मा, चंद्रकुमार तिवारी, समाज के वरिष्ठ कस्तुरी तिवारी, महिला ब्राम्हण समाज की अध्यक्ष रेखा तिवारी, कोषाध्यक्ष सुभाषिनी शर्मा, तनु मिश्रा, सोमा शर्मा, डॉ श्वेता पाण्डेय, रूचि शर्मा, रेणुका तिवारी, पूनम पाण्डेय, पुष्पांजलि पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में विप्रजन मौजूद थे। प्रारंभ में राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा एवं नगरपालिका अध्यक्ष ओमकुमारी साहू ने भगवान परशुराम की पूजा अर्चना कर दीप प्रज्जवलित किया।












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