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पारागांव में स्कूल का शौचालय तोड़कर उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण! बच्चों का फूटा गुस्सा, हाइवे पर चक्काजाम, मौके पर पहुंचा प्रशासन

(सीजी टॉकिज) नवापारा:- नवापारा से पारागांव में स्वास्थ्य सुविधा के लिए बनने वाला उप स्वास्थ्य केंद्र अब विवाद का केंद्र बन गया है। ग्राम पंचायत पारागांव के शासकीय मिडिल स्कूल परिसर में उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण को लेकर ग्रामीणों, शिक्षकों और विद्यार्थियों में भारी नाराजगी है। आरोप है कि निर्माण के लिए छात्राओं और महिला शिक्षकों के उपयोग में आने वाले महिला शौचालय को ही तोड़ दिया गया।

विवाद उस समय और बढ़ गया, जब शुक्रवार को स्कूल की 7वीं और 8वीं कक्षा के छात्र-छात्राओं ने स्कूल में तालाबंदी कर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। चक्काजाम के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलने पर तहसीलदार चंद्रशेखर मंडई और नवापारा थाना प्रभारी जितेंद्र दुबे समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बच्चों को समझाइश देकर चक्काजाम समाप्त कराया।

स्वास्थ्य केंद्र का स्कूल परिसर में निर्माण पर आपत्ति

पारागांव में बच्चों का फूटा गुस्साग्रामीणों का कहना है कि उन्हें गांव में उप स्वास्थ्य केंद्र बनने से कोई आपत्ति नहीं है। उनका सवाल केवल इतना है कि जब गांव में दूसरी सरकारी जमीन उपलब्ध है तो स्कूल परिसर में ही निर्माण क्यों कराया जा रहा है। स्कूल परिसर में पहले से ही मिडिल स्कूल, प्राथमिक शाला, आंगनबाड़ी, पंचायत भवन, महिला भवन एवं उप स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग है।

ग्रामीणों के मुताबिक स्कूल परिसर में निर्माण होने से बच्चों की पढ़ाई और अन्य गतिविधियां प्रभावित होंगी। वहीं शौचालय तोड़े जाने से छात्राओं और महिला शिक्षकों के सामने मूलभूत सुविधा का संकट खड़ा हो गया है। ग्रामीणों और स्कूल समिति की ओर से पहले ही संबंधित अधिकारियों को आवेदन देकर स्कूल परिसर में उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण नहीं कराने की मांग किए जाने की बात कही जा रही है। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने का आरोप है।

28.51 लाख के निर्माण में जमीन को लेकर पेच

मामले में अब निर्माण की जमीन को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। जानकारी के अनुसार उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण करीब 28.51 लाख रुपए की लागत से प्रस्तावित है। इसके लिए प्रस्तावित जमीन का खसरा नंबर 1181 बताया जा रहा है।

पारागांव में बच्चों का फूटा गुस्साग्रामीणों का दावा है कि खसरा नंबर 1181 की जमीन बस्ती क्षेत्र का है, जबकि वर्तमान में जिस जगह निर्माण कराया जा रहा है, वह खसरा नंबर 1158 बताई जा रही है। इसी जमीन पर शासकीय मिडिल स्कूल एवं अन्य भवन संचालित है। यानी सवाल सीधे तौर पर यह है कि प्रस्ताव 1181 का और निर्माण 1158 में क्यों?

पंचायत के प्रस्ताव और कार्रवाई विवरण में भी अंतर

बताया जा रहा है कि सरपंच सुरेश (भोले) सोनकर की ओर से खसरा नंबर 1158 की जमीन पर उप स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के लिए प्रस्ताव पारित होने की बात कही जा रही है। दूसरी ओर पंचायत बैठक की कार्रवाई विवरण में खसरा नंबर 1181 दर्ज होने का दावा किया जा रहा है। इस कथित विरोधाभास ने पूरे मामले को और पेचीदा बना दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन को पंचायत के प्रस्ताव, बैठक की कार्रवाई विवरण और निर्माण से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

एसएमसी की आपत्ति के बाद भी निर्माण पर सवाल

स्कूल प्रबंधन समिति यानी एसएमसी की बैठक में भी स्कूल की जमीन पर भविष्य में किसी प्रकार के निर्माण की स्वीकृति नहीं देने की बात कही गई थी। इसके बावजूद स्कूल परिसर में उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण शुरू होने से सवाल उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की जमीन का उपयोग किसी अन्य शासकीय निर्माण के लिए करने से पहले स्कूल प्रबंधन, शिक्षा विभाग और संबंधित प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट अनुमति और सहमति की स्थिति सामने आनी चाहिए।

शौचालय टूटा तो छात्राओं का फूटा गुस्सा

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा आक्रोश शौचालय तोड़े जाने को लेकर है। स्कूल में छात्राओं और महिला शिक्षकों के लिए बनाए गए शौचालय को निर्माण के लिए तोड़ दिए जाने का आरोप है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों के स्कूल में मूलभूत सुविधा उपलब्ध कराने के बजाय मौजूद सुविधा को ही हटा देना उचित नहीं है। यही वजह है कि छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को स्कूल के मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया और फिर सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया।

बच्चों की मांग है कि उप स्वास्थ्य केंद्र को स्कूल परिसर से हटाकर दूसरी सरकारी जमीन पर बनाया जाए और तोड़े गए महिला शौचालय का तत्काल पुनर्निर्माण कराया जाए। हालांकि सरपंच ने बताया कि पंचायत भवन के शौचालय को स्कूल के उपयोग के लिए दिया गया है।

बरगद की डालियां काटने पर भी उठे सवाल

आरोप है कि निर्माण के लिए स्कूल परिसर में मौजूद पुराने और छायादार बरगद के पेड़ की डालियां काट दिया गया है, जिसे लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य के लिए बिना आवश्यक अनुमति के पेड़ की डालियां काटी गईं। कटी हुई डंगालियों के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि लकड़ियों को वन विभाग को सौंपने के बजाय उन्हें बेचने या किसी अन्य व्यक्ति को दिए जाने की आशंका है।

हालांकि, सरपंच की ओर से पंच के माध्यम से कटी हुई डंगालियों को फेंकने की बात कही गई है। ऐसे में पेड़ काटने की अनुमति और कटी लकड़ियों के निस्तारण की भी जांच की मांग की जा रही है।

चक्काजाम के बाद प्रशासन पहुंचा मौके पर

पारागांव में बच्चों का फूटा गुस्साशुक्रवार को छात्र-छात्राओं के चक्काजाम की सूचना मिलते ही प्रशासन और पुलिस सक्रिय हुई। तहसीलदार चंद्रशेखर मंडई तथा नवापारा थाना प्रभारी जितेंद्र दुबे समेत शिक्षा विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने बच्चों से चर्चा की और उनकी मांगों को सुना। समझाइश के बाद बच्चों ने चक्काजाम समाप्त कर दिया, जिसके बाद मार्ग पर यातायात बहाल हो सका।

अब जांच के घेरे में पूरा मामला

पारागांव का यह विवाद अब केवल उप स्वास्थ्य केंद्र के निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है। निर्माण स्थल, खसरा नंबर, पंचायत प्रस्ताव, स्कूल एसएमसी की आपत्ति, महिला शौचालय तोड़े जाने और बरगद की डालियां काटे जाने को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई है तो जिम्मेदारी तय की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि गांव को स्वास्थ्य केंद्र चाहिए, लेकिन स्कूल की सुविधाओं की कीमत पर नहीं। उनकी मांग है कि उप स्वास्थ्य केंद्र को खसरा नंबर 1181 सहित किसी उपयुक्त सरकारी जमीन पर स्थानांतरित किया जाए, महिला शौचालय का पुनर्निर्माण कराया जाए और स्कूल परिसर को सुरक्षित रखा जाए।

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