अफवाहों से बचें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता : कलेक्टर भगवान सिंह उइके

अफवाहों से बचें, जिले में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी की पर्याप्त उपलब्धता : कलेक्टर भगवान सिंह उइके

(सीजी टॉकीज) गरियाबंद: जिले में पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी भगवान सिंह उइके ने जिलेवासियों से शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जिले में पेट्रोल, डीजल और घरेलू गैस (एलपीजी) की पर्याप्त उपलब्धता है तथा आम लोगों को घबराने की आवश्यकता नहीं है।

कलेक्टर ने कहा कि कुछ स्थानों पर अफवाहों के कारण लोग बड़ी संख्या में पेट्रोल पंपों और गैस एजेंसियों में पहुंच रहे हैं, जिससे अनावश्यक भीड़ की स्थिति बन रही है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और केवल आवश्यकता अनुसार ही ईंधन एवं गैस का क्रय करें।

जिले के सभी एसडीएम को कलेक्टर ने निर्देशित भी किया है कि आवश्यकतानुसार अपने अपने क्षेत्र के सभी पेट्रोल पंपों में कार्यपालिक दंडाधिकारियों की ड्यूटी भी लगाए।

जिला प्रशासन द्वारा आवश्यक आपूर्ति एवं वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। पेट्रोल पंपों एवं गैस एजेंसियों में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और आपूर्ति सामान्य रूप से जारी है। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि शांति एवं व्यवस्था बनाए रखने में प्रशासन का साथ दें। किसी भी प्रकार की सूचना या संदेश की सत्यता प्रशासन के अधिकृत माध्यमों से ही जांचें और अफवाह फैलाने से बचें।

जिला प्रशासन ने चेतावनी दी है कि भ्रामक जानकारी फैलाकर माहौल खराब करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई भी की जा सकती है।

गरियाबंद में पेट्रोल-डीजल वितरण को लेकर कलेक्टर का बड़ा आदेश

गरियाबंद में पेट्रोल-डीजल वितरण को लेकर कलेक्टर का बड़ा आदेश

 

(सीजी टॉकीज) गरियाबंद : गरियाबंद सहित पूरे जिले में पेट्रोल-डीजल की कमी और पेट्रोल पंपों में लग रही लंबी कतारों को देखते हुए भगवान सिंह उइके ने आवश्यक आदेश जारी किया है। आदेश के तहत अब दोपहिया वाहनों में अधिकतम 300 रुपये तथा चारपहिया वाहनों में 1000 रुपये तक ही पेट्रोल देने के निर्देश दिए गए हैं।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में पेट्रोल पंप संचालकों को ड्रम, जेरीकेन और बोतलों में पेट्रोल-डीजल देने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन कर ड्रम, जेरीकेन या बोतलों में ईंधन देने वाले पेट्रोल पंप संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासन के अनुसार जिले में पेट्रोल-डीजल की आंशिक जमाखोरी और कालाबाजारी की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है, ताकि आम लोगों को आसानी से ईंधन उपलब्ध हो सके और अनावश्यक संग्रहण पर रोक लगाई जा सके।

वहीं आदेश जारी होने के बाद पेट्रोल पंपों में निगरानी भी बढ़ा दी गई है और प्रशासनिक अमला लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

पेट्रोल-डीजल संकट की अफवाह: अभनपुर, नवापारा और गरियाबंद समेत कई जिलों में पंपों पर भारी भीड़, पुलिस बल तैनात

(सीजी टॉकीज) :- पश्चिम एशिया में बढ़ते ईरान-इजरायल तनाव और संभावित ईंधन संकट की अफवाहों का असर अब छत्तीसगढ़ में भी दिखाई देने लगा है। राजधानी रायपुर के अलावा जिले से लगे अभनपुर, गोबरा नवापारा और गरियाबंद सहित कई जिलों में पेट्रोल-डीजल को लेकर लोगों में अचानक घबराहट बढ़ गई। गुरुवार को पेट्रोल पंपों पर सुबह से देर रात तक वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। हालात ऐसे बन गए कि कई जगह पुलिस बल तैनात करना पड़ा।

अभनपुर क्षेत्र में स्थिति सबसे अधिक तनावपूर्ण नजर आई। यहां अम्बे फ्यूल्स पेट्रोल पंप सहित कई पंपों पर सैकड़ों वाहन चालक लाइन में खड़े दिखाई दिए। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिसकर्मी स्वयं पंपों पर पहुंचकर व्यवस्था संभालते नजर आए। वाहन चालकों को लाइन में लगाकर क्रमवार पेट्रोल दिलाया गया।

वहीं ग्राम गोतीयारडीह स्थित पेट्रोल पंप में पेट्रोल भरवाने को लेकर विवाद की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर मामला शांत कराया। बढ़ती भीड़ को देखते हुए कई पेट्रोल पंप संचालकों ने दो लीटर से अधिक पेट्रोल देने पर अस्थायी रोक लगा दी है।

वाहन चालकों का आरोप है कि कुछ पेट्रोल पंपों में ईंधन उपलब्ध होने के बावजूद “स्टॉक खत्म” होने की बात कहकर पेट्रोल-डीजल नहीं दिया जा रहा है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई लोग अपनी गाड़ियों की टंकियां फुल कराने के साथ अतिरिक्त ईंधन भी जमा करने की कोशिश करते नजर आए। स्थिति को देखते हुए कई पंप संचालकों ने सुरक्षा कारणों से केन, डिब्बों और ड्रम में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी है।

गोबरा नवापारा के भी पेट्रोल पंपों में भीड़ नजर आई। यहां दो पेट्रोल पंप बंद होने के कारण बस स्टैण्ड स्थिति छल्लानी पेट्रोल पंप में भारी भीड़ उमड़ पड़ी। भीड़ को देखते हुए पंप संचालक द्वारा प्रत्येक बाइक पर सिर्फ 100 रुपए का पेट्रोल दिया गया।

राजधानी रायपुर में भी पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारों को देखते हुए कलेक्टर ने पेट्रोल पंप एसोसिएशन और तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों की बैठक ली। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और किसी भी प्रकार की घबराहट की जरूरत नहीं है।

अधिकारियों के अनुसार, अफवाहों के चलते लोग सामान्य से अधिक ईंधन भरवा रहे हैं। जहां पहले लोग 1-2 लीटर पेट्रोल डलवाते थे, वहीं अब वाहन चालक फुल टैंक करा रहे हैं, जिससे पंपों पर असामान्य भीड़ बढ़ गई है।

प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए डिपो से 24 घंटे पेट्रोल सप्लाई की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले टैंकरों को दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक ही एंट्री की अनुमति थी।

गरियाबंद, बिलासपुर, बालोद, धमतरी, गुरुर और बस्तर संभाग के जगदलपुर सहित कई जिलों में भी यही स्थिति देखने को मिली। जगदलपुर में सामान्य दिनों की तुलना में पेट्रोल-डीजल की बिक्री दोगुनी से अधिक दर्ज की गई। कई पंपों पर एक ही दिन में साढ़े चार हजार लीटर से ज्यादा ईंधन बिकने की जानकारी सामने आई है।

कई स्थानों पर दोपहिया और चारपहिया वाहनों की कतारें मुख्य सड़क तक पहुंच गईं। घंटों इंतजार के बावजूद लोग लाइन छोड़ने को तैयार नहीं थे। भीड़ को संभालने में पंप कर्मचारियों और पुलिस को भारी मशक्कत करनी पड़ी।

मार खाने से बचने चलती ट्रैक्टर से कूदा चालक, नवापारा के गंज रोड में मचा हड़कंप, कई लोगों की सांसे अटकी

(सीजी टॉकिज) :- नवापारा में मंगलवार दोपहर एक ट्रैक्टर चालक की लापरवाही देखने को मिला। बताया जा रहा है कि शहर के सबसे व्यस्त गंज रोड स्थित पंजवानी चौक के पास खुद को बचाने की कोशिश में चालक ने ट्रैक्टर रोकने की बजाय चलती गाड़ी से ही छलांग लगा दी। चालक के कूदते ही रेत से भरा ट्रैक्टर बेकाबू हो गया और सीधे सड़क किनारे दो दुकानों के बीच जा फंसा।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक ट्रैक्टर क्रमांक सीजी 05 एएस 1920 इंदिरा मार्केट की ओर जा रहा था। इसी दौरान पंजवानी चौक के पास किसी युवक ने चालक को मारने के लिए दौड़ाया। मार खाने से बचने के लिए चालक ने चलती ट्रैक्टर ही छलांग लगा दी, जिसके बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

चालक के कूदते ही रेत से भरा ट्रैक्टर बेकाबू हो गया और सीधे सड़क किनारे स्थित बुक डिपो और कपड़े की दुकानों के बीच जा फंसा। ट्रैक्टर के दुकानों की ओर बढ़ते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए दौड़ पड़े। हादसे में दुकानों के सामने लगा लोहे का शेड बुरी तरह टूट गया। घटना के बाद चालक मौके से फरार हो गया। बाद में दूसरे इंजन की मदद से रेत भरी ट्रॉली को हटाया गया और काफी मशक्कत के बाद लोहे के एंगल में फंसे ट्रैक्टर इंजन को बाहर निकाला गया।

घटना के बाद स्थानीय व्यापारियों और लोगों में भारी आक्रोश देखा गया। लोगों का कहना है कि चालक की लापरवाही ने कई जिंदगियों को खतरे में डाल दिया। उनका कहना है कि ट्रैक्टर को नियंत्रित करने की बजाय चलती गाड़ी से कूद जाना बेहद गैरजिम्मेदाराना हरकत थी। फिलहाल घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है।

घड़े-बाल्टी लेकर हाईवे जाम: पानी संकट पर महिलाओं का फूटा गुस्सा, प्रशासन के आश्वासन के बाद खुला जाम

(सीजी टॉकिज) :- गरियाबंद जिले के पाण्डुका क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत पोंड में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे ग्रामीणों का सब्र आखिरकार टूट गया और डोंगरीपारा की सैकड़ों महिलाएं सड़क पर उतर आईं। महिलाओं ने घरों से बाल्टी, घड़े और बर्तन लेकर नेशनल हाईवे पर करीब एक घंटे तक चक्काजाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

ग्रामीण महिलाओं का आरोप है कि ग्राम पंचायत पोंड और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग हर साल पानी संकट का स्थायी समाधान करने के दावे करते हैं, लेकिन स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है। लोगों का कहना है कि “आज-कल समस्या हल होगी” कहकर केवल आश्वासन दिया जाता रहा, जबकि गांव में पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है।

प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र किया जाएगा। महिलाओं ने बताया कि डोंगरीपारा में दर्जनों बोर खनन कराए गए, लेकिन एक भी सफल नहीं हुआ। वहीं लाखों रुपए की लागत से बनी पानी टंकी भी सूखी पड़ी है, जिससे ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को सुझाव देते हुए कहा कि कुकदा डैम से पाइपलाइन के जरिए पानी की व्यवस्था की जाए, तभी क्षेत्र की गंभीर जल समस्या का समाधान संभव है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जल संसाधन विभाग द्वारा कुछ समय पहले निस्तारी के लिए पानी छोड़ा गया था, लेकिन वह कई गांवों के तालाबों तक पहुंच ही नहीं पाया और हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह गया।

चक्काजाम की सूचना मिलते ही जिला पंचायत सीईओ और लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि गांव में तत्काल तीन नए बोर खनन की अनुमति दी गई है। इसके बाद करीब एक घंटे बाद महिलाओं ने आंदोलन समाप्त कर सड़क से जाम हटाया।

इधर, छुरा जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष कुलेश्वर सोनवानी ने भी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि “मैं खुद सत्ताधारी दल का जनप्रतिनिधि हूं, लेकिन अधिकारी हमारी तक नहीं सुन रहे हैं। कई बार जल संसाधन विभाग से पानी छोड़ने की मांग की गई, लेकिन आज तक कई गांवों के तालाबों तक पानी नहीं पहुंचा। जब जनप्रतिनिधियों की बात नहीं सुनी जा रही, तो आम जनता की समस्या कौन सुनेगा?” उन्होंने लापरवाह अधिकारियों को हटाकर संवेदनशील अधिकारियों की नियुक्ति की मांग की।

सुशासन तिहार में बच्चों से कराई गई व्यवस्था, आयोजन पर उठे सवाल

(सीजी टॉकीज) गरियाबंद : सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सुशासन तिहार’ में ही व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। जिले के ग्राम पोखरा में आयोजित समाधान शिविर के दौरान मुख्य मंच के सामने नाबालिग बच्चे नाश्ता और शरबत परोसते नजर आए।

कार्यक्रम में प्रभारी मंत्री, विधायक, कलेक्टर सहित कई अधिकारी मौजूद थे, लेकिन बच्चों से कराए जा रहे काम पर किसी का ध्यान नहीं गया।

सुशासन तिहार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का समाधान करना और शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाना बताया जाता है। लेकिन जिस आयोजन में समस्याओं के समाधान का दावा किया जा रहा था, वहीं बच्चों से काम कराए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन बच्चों के हाथों में पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी होनी चाहिए, उन्हें आयोजन की व्यवस्थाओं में लगा दिया गया। मंच के सामने बच्चे लगातार अतिथियों और लोगों को शरबत व नाश्ता परोसते दिखाई दिए। इससे कार्यक्रम की तैयारियों और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि प्रशासन अक्सर नियमों और जिम्मेदारियों की बात करता है, लेकिन सरकारी आयोजन में ही बच्चों से काम कराया जाना सुशासन के दावों की पोल खोलता नजर आया। अब चर्चा इस बात की है कि क्या इस मामले में जिम्मेदार अधिकारी कोई संज्ञान लेते हैं या मामला केवल चर्चा तक सीमित रह जाएगा।

सीएमओ कक्ष में घमासान! अकाउंटेंट-सब इंजीनियर में मारपीट, वेतन विवाद पर जमकर चले लात-घूंसे, VIDEO वायरल

(सीजी टॉकिज) :- गरियाबंद जिले के देवभोग नगर पंचायत में वेतन भुगतान को लेकर नगर पंचायत कार्यालय के भीतर जमकर बवाल हो गया। सीएमओ कक्ष में अकाउंटेंट और सब इंजीनियर के बीच हुई मारपीट हुई। जिसका सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। वीडियो वायरल होने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। घटना के बाद कर्मचारी यूनियन में भारी आक्रोश है और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग की गई है।

जानकारी के मुताबिक वेतन भुगतान में देरी को लेकर नाराज सब इंजीनियर श्याम सुंदर पटनायक ने नगर पंचायत के अकाउंटेंट संदीप चंद्राकर को सीएमओ कक्ष में बुलाया था। आरोप है कि बातचीत के दौरान विवाद इतना बढ़ गया कि इंजीनियर के साथ आए तीन बाहरी सहयोगियों ने अकाउंटेंट के साथ मारपीट शुरू कर दी।

पूरी घटना कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है।
वीडियो में अकाउंटेंट के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट साफ दिखाई दे रही है। घटना के बाद आरोपी बताए जा रहे तीनों लोग कार में बैठकर मौके से फरार हो गए। इसके बाद दोनों पक्ष देवभोग थाने पहुंचे और एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

नगर पंचायत के सीएमओ दुष्यंत कुमार ने भी थाने पहुंचकर बयान दिया है। उन्होंने कार्यालय के भीतर बाहरी लोगों द्वारा मारपीट को गंभीर और अनुचित बताया है। पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि वायरल सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद आगे नियमानुसार कार्रवाई की जाएंगी।

इधर घटना को लेकर कर्मचारी यूनियन में भारी नाराजगी है। यूनियन के सदस्य बड़ी संख्या में देवभोग थाने पहुंचे और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और धरना प्रदर्शन किया जाएगा। नगर पंचायत कर्मचारियों ने भी निकाय कार्यालय में इस तरह की घटना को गंभीर बताते हुए दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और बाहरी हस्तक्षेप रोकने की मांग की है।

टेंगनाबासा पंचायत में सचिव पर लगे गंभीर आरोप, एक साल से शिकायतें, फिर भी कार्रवाई नहीं; पंचायत में बढ़ा आक्रोश

(सीजी टॉकिज) :- गरियाबंद जिले के छुरा ब्लॉक अंतर्गत टेंगनाबासा ग्राम पंचायत में पंचायत सचिव को लेकर विवाद अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। सचिव सरोज कुमार ठाकुर पर पंचायत निधि में आर्थिक अनियमितता, आय-व्यय की जानकारी छिपाने और पंचायत राशि दूसरे व्यक्तियों के खातों में ट्रांसफर करने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामले को लेकर उपसरपंच और पंचों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत के उपसरपंच रेखचंद साहू सहित 9 पंचों ने जनपद पंचायत छुरा, जिला पंचायत गरियाबंद, कलेक्टर जनदर्शन और राजिम विधायक तक लिखित शिकायत सौंपकर सचिव को तत्काल हटाने तथा पूरे वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत बैठकों में सचिव द्वारा कभी भी आय-व्यय का स्पष्ट हिसाब प्रस्तुत नहीं किया जाता। पंचायत प्रतिनिधियों को वित्तीय जानकारी से दूर रखा जा रहा है, जिससे लगातार संदेह और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।

मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पंचायत राशि कथित रूप से अन्य लोगों के खातों में ट्रांसफर किए जाने का आरोप सामने आया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत निधि वास्तव में दूसरे खातों में जमा की गई है तो यह बेहद गंभीर वित्तीय गड़बड़ी है और इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।

सूत्रों के मुताबिक पंचायत प्रतिनिधि पिछले एक वर्ष से लगातार शिकायत कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। पंचायत के रिकॉर्ड और खर्चों में पारदर्शिता नहीं होने के कारण मामला लगातार गरमाता जा रहा है।

नियमानुसार होगी कार्रवाई-CEO

इस पूरे मामले पर जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा है कि शिकायत की जानकारी मिली है। मैं स्वयं आवेदन को देखूंगा। प्रथम दृष्टया तथ्य पाए जाने पर जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि निष्पक्ष जांच होने पर पंचायत निधि और खर्चों से जुड़े कई बड़े खुलासे हो सकते हैं।

कमार परिवार को तत्काल राहत: राशन कार्ड से लेकर आवास सर्वे तक शुरू, सोशल मीडिया में खबर वायरल होते ही प्रशासन ने लिया संज्ञान

(सीजी टॉकिज) :- गरियाबंद जिला में सोशल मीडिया पर एक विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) कमार परिवार की दयनीय स्थिति की खबर वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत पहुंचानी शुरू कर दी है। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर परिवार को शासन की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

जिला प्रशासन द्वारा जारी जानकारी के अनुसार संबंधित कमार परिवार लंबे समय से उड़ीसा राज्य में निवासरत था और हाल ही में मैनपुर ब्लॉक क्षेत्र में वापस लौटा है। इसी कारण परिवार का नाम वर्ष 2011 और 2018 के प्रधानमंत्री आवास योजना सर्वे में शामिल नहीं हो पाया था। वहीं वर्ष 2024 के नवीन सर्वेक्षण के दौरान भी परिवार गांव में मौजूद नहीं मिला था।

प्रशासन ने बताया कि परिवार के वापस लौटने की जानकारी मिलते ही तत्काल कार्रवाई करते हुए उनका राशन कार्ड, मनरेगा जॉब कार्ड और आयुष्मान कार्ड बनवाया गया है। साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर अस्थायी रहने की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। इसके अलावा परिवार का पीएम-जनमन योजना के तहत सर्वे शुरू कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि पात्रता के आधार पर आगामी तीन माह के भीतर परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सीईओ ने बताया कि शासन की मंशा है कि कोई भी पात्र परिवार योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। जिले में शेष पात्र हितग्राहियों की सूची तैयार कर भारत सरकार से स्वीकृति की प्रक्रिया भी जारी है।

जानिए पूरा मामला

दरअसल, गरियाबंद जिले के देवभोग जनपद क्षेत्र अंतर्गत माडागांव में 8 मई को सुशासन तिहार शिविर लगाया गया। यहां ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान पवन सिंह और उनकी पत्नी सुकदी बाई भी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। दंपती देवभोग विकासखंड के बरही गांव का रहने वाला है।

अधिकारी के सामने दंडवत हुए

शिविर में पति-पत्नी जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर के सामने दंडवत प्रणाम करते हुए लेट गए और अधिकारी से खुद के लिए प्रधानमंत्री आवास के तहत घर दिलाने और राशन कार्ड की मांग की। दंपती का कहना था कि वे लंबे समय से आवास योजना का लाभ पाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें पक्का मकान नहीं मिला है।

अपनी परेशानी बताते हुए दंपती ने सीईओ के पैरों में गिर पड़े और जल्द से जल्द आवास दिलाने की गुहार लगाने लगे। वहीं कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने परिवार की बात सुनी और जांच के बाद नियम के अनुसार कार्रवाई करने और मदद का भरोसा दिया।

संवाद से सुलझा विवाद: पटवारी संघ ने खत्म किया विरोध, जनता के काम में नहीं आएगी रुकावट

(सीजी टॉकिज) :- गरियाबंद जिले में सुशासन तिहार के दौरान उत्पन्न हुए विवाद के बाद राजस्व पटवारी संघ और राजिम विधायक रोहित साहू के बीच सौहार्दपूर्ण चर्चा के बाद मामला शांत हो गया है। पटवारी संघ ने बहिष्कार समाप्त करते हुए भविष्य में बेहतर समन्वय और संवाद के साथ कार्य करने की सहमति जताई है।

जानकारी के अनुसार, शिविर के दौरान हुई एक टिप्पणी को लेकर पटवारी संघ में नाराजगी उत्पन्न हो गई थी, जिसके विरोध स्वरूप संघ ने शिविर का बहिष्कार कर दिया था। मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई थी। विवाद को बढ़ने से रोकने के लिए विधायक रोहित साहू ने मीडिया के माध्यम से खेद व्यक्त करते हुए कहा कि उनका उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी का अपमान करना नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का समाधान करना है। विधायक की इस पहल के बाद राजस्व पटवारी संघ जिला गरियाबंद का प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने पहुंचा।

बैठक के दौरान संघ के प्रतिनिधियों ने अतिरिक्त हल्कों का भार, सीमित संसाधनों में कार्य करने की कठिनाइयों और ग्रामीण क्षेत्रों में राजस्व कार्यों के दबाव जैसी समस्याओं को विस्तार से रखा। विधायक ने सभी बातों को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि राजस्व विभाग शासन और जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है तथा पटवारियों की भूमिका ग्रामीण क्षेत्रों में अत्यंत अहम है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद सबसे प्रभावी माध्यम है और किसी भी गलतफहमी को बातचीत के जरिए दूर किया जा सकता है। साथ ही अधिकारियों और कर्मचारियों से जनता की समस्याओं के त्वरित निराकरण में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने की अपील की। बैठक के बाद पटवारी संघ ने बहिष्कार समाप्त करने की घोषणा की और कहा कि शासन की योजनाओं तथा राजस्व संबंधी कार्यों को आम जनता तक सुचारु रूप से पहुंचाना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुलाकात के दौरान राजस्व पटवारी संघ के जिलाध्यक्ष गुलशन यदु, उपाध्यक्ष आशीष चतुर्वेदी, सचिव लव कुमार साहू, तहसील अध्यक्ष नरेंद्र साहू, अभिषेक चतुर्वेदी, मनीष पारकर, झामन यादव एवं राजेश माण्डले सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद थे।