गरियाबंद नेशनल हाईवे की सड़क धंसी, विभागीय लापरवाही ने बढ़ाया बड़े हादसे का खतरा, पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

(सीजी टॉकिज) गरियाबंद :- मानसून की पहली तेज बारिश ने गरियाबंद जिले के नेशनल हाईवे पर हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पोल खोल दी है। जिले के ग्राम श्यामनगर में पेट्रोल पंप के समीप नेशनल हाईवे की सड़क और उससे लगी नाली का बड़ा हिस्सा धंस गया है। लगातार बारिश के कारण सड़क किनारे तेज कटाव हो रहा है, जिससे हाईवे पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि यह मार्ग जिले के सबसे व्यस्त मार्गों में से एक है, जहां दिन-रात भारी ट्रकों, बसों और छोटे वाहनों की आवाजाही बनी रहती है, लेकिन अब तक न तो क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत शुरू हुई है और न ही सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो यह क्षतिग्रस्त सड़क किसी भी दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।

ग्रामीणों के अनुसार सड़क और नाली का निर्माण हाल के वर्षों में किया गया था, लेकिन निर्माण के दौरान गुणवत्ता का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा गया। पहली ही तेज बारिश में सड़क का किनारा धंसने लगा और नाली भी क्षतिग्रस्त हो गई। लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पहली बारिश में ही सड़क जवाब दे दे, तो यह संबंधित विभाग और निर्माण एजेंसी की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है।

ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। उनका कहना है कि यदि निर्माण सही तरीके से किया गया होता और समय-समय पर रखरखाव होता, तो सड़क की यह स्थिति नहीं बनती। ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने और दोषी अधिकारियों व ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

दिन-रात गुजरते हैं भारी वाहन

यह नेशनल हाईवे क्षेत्रीय यातायात की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों ट्रक, बसें, यात्री वाहन और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। सड़क का किनारा धंस जाने से वाहन चालकों के लिए खतरा बढ़ गया है। विशेषकर रात के समय या तेज बारिश के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कोई भारी वाहन सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की ओर चला गया तो बड़ा हादसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

क्षतिग्रस्त सड़क के बावजूद मौके पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए हैं। न तो प्रभावी बैरिकेडिंग की गई है और न ही वाहन चालकों को सतर्क करने के लिए चेतावनी संकेत लगाए गए हैं।

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