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गरियाबंद में आफत की बारिश: निर्माणाधीन पुल में फंसे मजदूर, प्रशासन ने किया रेस्क्यू; पुलिया बहने से दर्जनों गांवों से संपर्क टूटा

(सीजी टॉकिज) गरियाबंद :- मानसून की पहली झमाझम बारिश में एक ओर जहां किसानों के चेहरों पर मुस्कान दिख रही है, वहीं ग्रामीण अंचलों में बड़ी मुसीबत भी खड़ी कर दी। शनिवार आधी रात से हो रही मूसलाधार बारिश में कोसमबुड़ा-सारागांव होते हुए उड़ीसा सीमा को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित छोटे नाले की पुलिया तेज बहाव में बह गया। जिससे दर्जनों गांवों का आवागमन प्रभावित हो गया।

रविवार सुबह जब लोग रोजमर्रा के कामों के लिए निकले तो पुलिया टूटी मिली। कई वाहन बीच रास्ते से ही वापस लौट गए। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर लोगों को क्षतिग्रस्त हिस्से से दूर रहने की सलाह दी है।

पहली बारिश में जनजीवन अस्त-व्यस्त

क्षेत्र के किसान कई दिनों से मानसून की राह देख रहे थे। बारिश नहीं होने से खेतों की तैयारी और बुआई का काम पिछड़ रहा था। शनिवार को आखिरकार मानसून ने जोरदार दस्तक दी, लेकिन एक ही रात की तेज बारिश ने जनजीवन को भी अस्त-व्यस्त कर दिया। खेतों में पानी भरने से किसानों को राहत मिली, लेकिन सड़क मार्ग से छोटे पुलिया बहने जैसी घटनाओं ने चिंता बढ़ा दी है।

रातभर उफनाया नाला, बहाव नहीं झेल सकी पुलिया

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार पूरी रात हुई तेज बारिश से नाले का जलस्तर अचानक बढ़ गया। तेज बहाव के दबाव में पुलिया का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त होकर बह गया। सुबह तक सड़क पूरी तरह जलमग्न हो गया, जिससे आवागमन रोकना पड़ा।

दर्जनों गांवों से संपर्क टूटा

पुलिया क्षतिग्रस्त होने से दुल्ला, सारागांव, नवापारा, कोसमी, चुरकीदादर सहित आसपास के दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों को अब बाजार, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालयों तक पहुंचने के लिए लंबा वैकल्पिक रास्ता तय करना पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि यह सड़क उनके लिए जीवनरेखा से कम नहीं था। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर कृषि उपज के परिवहन तक अधिकांश गतिविधियां इसी मार्ग पर निर्भर हैं।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी मंडराया संकट

बरसात के मौसम में ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच पहले ही कठिन होती है। ऐसे में पुलिया टूटने से आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुंचाना बड़ी चुनौती बन सकता है। साथ ही कृषि उपज, दैनिक उपयोग की वस्तुओं और आवश्यक सामान की आपूर्ति भी प्रभावित होने की आशंका है।

जिलेभर में मानसून का असर, नदी-नाले उफान पर

शनिवार की रात से हो रही बारिश रविवार दोपहर तक जारी रहा। छुरा सहित गरियाबंद जिले के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण नदी-नाले उफान पर हैं। कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई है। बारिश का यही सिलसिला जारी रहा तो अन्य पुल-पुलियों और संपर्क मार्गों पर भी खतरा बढ़ सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से क्षतिग्रस्त पुलिया का तत्काल निरीक्षण कर मरम्मत कार्य शुरू कराने तथा आवागमन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है।

निर्माणाधीन पुल पर काम कर रहे 14 मजदूर फंसे, रेस्क्यू टीम ने बचाया

गरियाबंद जिले के ग्राम बीजापाल स्थित बगनई नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से निर्माणाधीन पुल पर कार्य कर रहे 14 मजदूर फंस गए। लगातार बारिश के कारण नदी का बहाव इतना तेज हो गया कि मजदूरों के लिए बाहर निकलना असंभव हो गया। जान बचाने के लिए सभी मजदूर नदी किनारे एक पेड़ पर चढ़ गए और पूरी रात वहीं बिताई। फंसे मजदूरों में 10 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल थीं।

रात में अंधेरा और तेज बहाव के कारण बचाव अभियान शुरू नहीं किया जा सका। सुबह होते ही गरियाबंद और महासमुंद जिला प्रशासन की संयुक्त रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। कड़ी मशक्कत के बाद सभी मजदूरों को सकुशल बाहर निकाल लिया गया। समय रहते चलाए गए इस अभियान से एक बड़ा हादसा टल गया। प्रशासन ने लगातार हो रही बारिश को देखते हुए नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों और निर्माण कार्यों में लगे श्रमिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

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