(सीजी टॉकिज) राजिम:- छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल राजिम के त्रिवेणी संगम में बना लक्ष्मण झूला इन दिनों बदइंतजामी का शिकार नजर आ रहा है। झूले पर लगी लाइटें पिछले करीब एक सप्ताह से बंद पड़ी हैं। शाम होते ही यहां अंधेरा छा जाता है और श्रद्धालुओं व सैलानियों को मोबाइल की टॉर्च जलाकर लक्ष्मण झूला पार करना पड़ रहा है।
राजिम को छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहा जाता है। महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के त्रिवेणी संगम पर स्थित यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है। यहां भगवान राजीव लोचन, भगवान कुलेश्वरनाथ के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं। वहीं लक्ष्मण झूला भी पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है।
बाढ़ के बीच अंधेरा, बढ़ी परेशानी
इन दिनों महानदी में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए संगम क्षेत्र में लोगों को अधिक सतर्कता के साथ आवाजाही करने की जरूरत है। ऐसे समय में लक्ष्मण झूला की लाइटों का बंद होना सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है। अंधेरे में झूले से गुजरने वाले लोगों को डर और असहजता का सामना करना पड़ रहा है। लाइट व्यवस्था बंद होने के कारण कई लोग मोबाइल की टॉर्च के सहारे रास्ता तलाशते हुए नजर आ रहे हैं। खासकर बुजुर्गों, बच्चों और महिलाओं के लिए अंधेरे में झूला पार करना परेशानी का कारण बन रहा है।
आकर्षण का केंद्र था लक्ष्मण झूला, अब पसरा अंधेरा
लक्ष्मण झूला पर लगी आकर्षक लाइटें रात के समय दूर से ही लोगों का ध्यान खींचती थीं। शाम ढलते ही रोशनी से जगमगाता झूला राजिम की खूबसूरती में चार चांद लगाता था। सैलानी यहां पहुंचकर फोटो, वीडियो और सोशल मीडिया के लिए रील भी बनाते हैं। लेकिन पिछले एक सप्ताह से लाइटें बंद होने के कारण रात में लक्ष्मण झूला की रौनक गायब है। त्योहारी मौसम में जब राजिम में बड़ी संख्या में पर्यटकों और श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है, तब इस तरह की अव्यवस्था चिंता का विषय बनी हुई है।
जिम्मेदारों को नहीं दिख रहा अंधेरा?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले करीब सप्ताहभर से लाइटें बंद हैं तो अब तक इन्हें दुरुस्त क्यों नहीं कराया गया? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं है या फिर शिकायत के बावजूद इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा? राजिम जैसे प्रसिद्ध धार्मिक और पर्यटन स्थल के प्रमुख आकर्षण लक्ष्मण झूला पर सप्ताहभर से अंधेरा पसरा होना व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा करता है। यहां 24 घंटे बिजली और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी न हो।
तुरंत सुधार की मांग
स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और सैलानियों ने संबंधित विभाग से मांग की है कि लक्ष्मण झूला की बंद पड़ी सभी लाइटों को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। साथ ही नियमित रूप से लाइटिंग और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाए, ताकि आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अंधेरे में मोबाइल टॉर्च के सहारे चलने की मजबूरी न हो।
प्रश्न यही है कि जब राजिम को पर्यटन और धार्मिक नक्शे पर चमकाने की बात होती है, तो फिर उसके सबसे बड़े आकर्षणों में से एक लक्ष्मण झूला सप्ताहभर तक अंधेरे में क्यों पड़ा है?




