(सीजी टॉकिज) रायपुर:- आरंग क्षेत्र के कुरूद स्थित महानदी तट पर रात के सन्नाटे का फायदा उठाकर बड़े पैमाने पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सख्त रोक और नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए यहां रात भर भारी-भरकम मशीनें गरज रही हैं।
हैरानी की बात यह है कि बीते दिनों इसी खदान के संचालन को लेकर आयोजित जनसुनवाई में स्थानीय ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया था। इसके बावजूद, नियम-कायदों को ताक पर रखकर रेत का यह काला कारोबार बिना किसी खौफ के जारी है।
2 जेसीबी, दर्जनों ट्रैक्टर और हाइवा वाहनों का जमघट
मौके से मिले एक्सक्लूसिव वीडियो/फोटो और गुप्त जानकारियों से इस बात का स्पष्ट खुलासा हुआ है कि महानदी के सीने से रात भर अवैध रूप से रेत निकाली जा रही है। उत्खनन स्थल पर 2 जेसीबी मशीनें, दर्जनों ट्रैक्टर और कई भारी-भरकम हाइवा वाहन लगातार सक्रिय हैं।
जांच में यह बेहद चौंकाने वाला पहलू सामने आया है कि इस पूरे अवैध खेल में कुछ स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों और ग्रामीणों की भी सीधी संलिप्तता है। कार्ययोजना के तहत पहले ग्रामीणों के ट्रैक्टरों के जरिए नदी के भीतर से रेत निकालकर एक जगह डंप की जाती है, फिर जेसीबी मशीनों से उस रेत को तेज़ी से हाइवा वाहनों में लोड कर दिया जाता है।
15,000 रुपये प्रति हाइवा का रेट: अंतरजिले तक सप्लाई की चेन
सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के अनुसार, इस अवैध उत्खनन स्थल पर प्रति हाइवा रेत लोड करने के बदले लगभग 15,000 रुपये की दर से मोटी रकम वसूली जा रही है।
कुरूद रेत खदान की बारीक रेत की मांग निर्माण कार्यों में अत्यधिक है, इसी भारी मांग का फायदा उठाते हुए यहाँ से निकाली गई रेत को सिर्फ राजधानी रायपुर ही नहीं, बल्कि बेमेतरा, कवर्धा और राज्य के अन्य दूर-दराज के जिलों तक धड़ल्ले से अवैध रूप से सप्लाई किया जा रहा है।
जनसुनवाई में विरोध, पर रात में भारी वाहनों की बेधड़क आवाजाही
उल्लेखनीय है कि कुरूद में रेत खदान की लीज और संचालन को लेकर हुई प्रशासनिक जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पर्यावरण नुकसान और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारी विरोध जताया था। लेकिन इसके विपरीत, रात के समय स्थानीय संलिप्तता के बल पर दर्जनों वाहनों की आवाजाही जारी रहती है। संकरे रास्तों पर तेज रफ्तार दौड़ते इन भारी वाहनों और रात में चल रही मशीनों के कारण क्षेत्र में कभी भी कोई अप्रिय घटना या भीषण सड़क दुर्घटना घटने की गंभीर आशंका बनी हुई है।
जिम्मेदार अधिकारी बेखबर या जानबूझकर मौन..?
विगत 4 से 5 घंटों से नदी तट पर अवैध उत्खनन की यह पूरी प्रक्रिया बेधड़क चल रही है, लेकिन अब तक न तो स्थानीय पुलिस और ना ही खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची है। शासन के सख्त निर्देशों के बावजूद जिम्मेदार तंत्र का बेखबर रहना या मौन साधे रखना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। इस अवैध कारोबार के चलते रोज राज्य सरकार को लाखों रुपये के राजस्व की चपत लग रही है।
अब देखना यह होगा कि वीडियो/फोटो साक्ष्यों और इस समाचार के उजागर होने के बाद जिम्मेदार अधिकारी और विभाग क्या कोई ठोस व सख्त दंडात्मक कार्रवाई करते हैं, या फिर यह अवैध खेल यूं ही जारी रहेगा?
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